कच्चा इस्पात उत्पादन जनवरी में चार प्रतिशत गिरकर 89.95 लाख टन रहा

नई दिल्ली, । देश का कच्चा इस्पात उत्पादन जनवरी 2019 में 3.84 प्रतिशत गिरकर 89.95 लाख टन रह गया। संयुक्त संयंत्र समिति (जेपीसी) ने यह जानकारी दी है। इस्पात उत्पादन में गिरावट की रिपोर्ट ऐसे समय आयी है जब हाल ही में विश्व इस्पात संगठन ने कहा है कि जापान को पीछे छोड़ते हुये भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक देश बन गया है। संगठन ने 25 जनवरी को कहा था कि 2018 में देश का कच्चा इस्पात उत्पादन 1,065 लाख टन रहा जो जापान के 1,043 लाख टन से अधिक है।

जेपीसी ने हालिया रिपोर्ट में कहा, कच्चा इस्पात उत्पादन जनवरी 2019 में 89.95 लाख टन रहा जो जनवरी 2018 की तुलना में 3.80 प्रतिशत और दिसंबर 2018 की तुलना में 0.20 प्रतिशत कम है। जनवरी 2018 में देश का कच्चा तेल उत्पादन 93.55 लाख टन रहा था। जनवरी महीने में सरकारी कंपनियों सेल और राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड तथा निजी कंपनियों जेएसडब्ल्यू स्टील, टाटा स्टील, जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड और एस्सार स्टील ने मिलकर 54.86 लाख टन कच्चा इस्पात का उत्पादन किया। शेष उत्पादन अन्य कंपनियों ने किया। जनवरी 2019 में गर्म धातु का उत्पादन पिछले साल की तुलना में 3.3 प्रतिशत बढ़कर 61.94 लाख टन रहा। हालांकि, कच्चा लोहा का उत्पादन इस दौरान तीन प्रतिशत गिरकर 5.26 लाख टन पर आ गया। देश ने 2030 तक कच्चा इस्पात उत्पादन बढ़ाकर तीन करोड़ टन करने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिये 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। मंत्रिमंल ने इस बाबत पहले ही राष्ट्रीय इस्पात नीति को मंजूरी दे दी है।

आरबीआई के विशेष एमएसएमई पैकेज से एक लाख करोड़ रुपये कर्ज के पुनर्गठन की उम्मीद: वित्त सचिव

मुंबई, 10 फरवरी (वेबवार्ता)। रिजर्व बैंक के पुनर्गठन पैकेज की घोषणा से इसकी पात्रता रखने वाले सात लाख सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के एक लाख करोड़ रुपये के कर्ज को पुनर्गठित करने में मदद मिलेगी। एक शीर्ष सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक ने पिछले महीने छोटी कारोबारी इकाइयों के लिए उनके ऋण का पुनर्गठन की एकबारगी सुविधा दी है। इसमें छोटे उद्योगों के कर्ज को एनपीए घोषित किये बिना रिण की अवधि और ब्याज दर में संशोधन किया जायेगा। रिजर्व बैंक ने यह सुविधा 25 करोड़ रुपये तक के मानक श्रेणी के कर्ज पर दी है। वित्तीय सेवा विभाग के सचिव राजीव कुमार ने यह अनुमान जताया है। उनका यह अनुमान घरेलू रेटिंग एजेंसी इक्रा के अनुमान से काफी अधिक है। इक्रा का अनुमान है कि रिजर्व बैंक के इस कदम से 10,000 करोड़ रुपये के ऋण का ही पुनर्गठन हो सकेगा। राजीव कुमार ने कहा कि सात लाख छोटी एवं मझोली इकाइयों को कर्ज पुनर्गठन की जरूरत है। कुमार ने शुक्रवार को एक बैठक में कहा, संपत्ति की श्रेणी को कम किए बिना इन सभी इकाइयों के रिण का पुनर्गठन मार्च 2020 तक किया जा सकता है। इसमें एक लाख करोड़ रुपये के ऋण का पुनर्गठन हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस योजना से अतिरिक्त संसधानों को मुक्त करने में मदद मिलेगी, जिससे मांग बढ़ेगी और उद्योग में नए अवसर सृजित होंगे। उल्लेखनीय है कि विश्लेषकों ने आरबीआई की इस पहल को पीछे हटने वाला कदम बताया है क्योंकि रिजर्व बैंक ने आधिकारिक रूप से कर्ज पुनर्गठन की गतिविधियों को आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया था। रिण पुनर्गठन को बैंकों के ऊंचे एनपीए के लिये जिम्मेदार कारकों में से एक माना गया है। रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल की नवंबर 2018 में हुई अहम बैठक में सूक्ष्म, लघु एवं मझौले उद्योगों के मामले में रिण पुनर्गठन पर गौर करने की सिफारिश की गई थी। यह बैठक तब हुई थी जब सरकार और रिजर्व बैंक कुछ मुद्दों का लेकर आमने सामने आ गये थे। हालांकि, बैंकरों का कहना है कि एमएसएमई इस सुविधा का लाभ उठाने के लिये आगे आने से कतरा रहे हैं। निजी क्षेत्र के एक बैंक ने कहा कि बेशक कर्ज मानक बना रहेगा लेकिन इससे कर्जलेनदार का रिकार्ड प्रभावित होता है जिससे उन्हें बाद में कभी परेशानी हो सकती है।

5,740 करोड़ की वसूली के लिए एसबीआई-ओरिएंटल बैंक की पहल

नई दिल्ली, 10 फरवरी (वेबवार्ता)। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) ने करीब 5,740 करोड़ रुपये की बकाया राशि वसूलने के लिए विभिन्न सकंटग्रस्त (एनपीए) खातों को बिक्री के लिए रखा है। देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने 4,975 करोड़ रुपये की वसूली के लिए संपत्ति पुनर्गठन कंपनियों (एआरसी) और वित्तीय संस्थानों से बोली आमंत्रित की है।

बैंक द्वारा बिक्री के लिए रखे गए खातों में बड़ी संख्या में छोटे एवं मंझोले उद्यमों (एसएमई) के खाते हैं, उन पर कुल 4,667 करोड़ रुपये का बकाया है। वेबसाइट पर डाले गये निविदा दस्तावेज के मुताबिक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स 13 खातों की बिक्री करना चाहता है, इनमें कुल 764.44 करोड़ रुपये का बकाया है।

स्टेट बैंक ने 281 एसएमई खातों को बिक्री के लिए रखा है। ये खाते उन कंपनियों से जुड़े हैं जिन पर 50 करोड़ रुपये तक का बकाया है। इन कंपनियों पर कुल बकाया 4,666.50 करोड़ रुपये है। एसबीआई ने नीलामी नोटिस में कहा, नियामकीय दिशा-निर्देश के अनुरूप वित्तीय संपत्ति की बिक्री को लेकर बैंक की नीति के तहत हम इन खातों को संपत्ति पुनर्गठन कंपनियों (एआरसी)/ बैंक/ एनबीएफसी/ वित्तीय संस्थानों के समक्ष रखेंगे।

इसके अलावा, एसबीआई तीन अन्य खातों की भी बिक्री करेगा। इनमें डेनिस स्टील्स प्राइवेट लिमिडेट (258.73 करोड़ रुपये), शिवा स्पेश्यिलिटी यार्न (37.90 करोड़ रुपये) और बंसीधर स्पीनिंग एंड वीविंग्स मिल्स लिमिटेड (11.73 करोड़ रुपये) शामिल हैं। एसबीआई खातों के लिए ई-बोली 27 फरवरी को होगी जबकि ओबीसी की ई-बोली 25 फरवरी को प्रस्तावित है।

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