Health Alert : अंधेपन का कारण न बन जाए ट्रेकोमा, जानें इसके बारे में सबकुछ

आंखों की कुछ गंभीर बीमारियों में शामिल ट्रेकोमा कई बार अंधेपन का कारण बन जाता है। इसमें साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी हो जाता है। आखिर क्या है यह बीमारी और इससे बचाव के क्या हैं उपाय, विशेषज्ञ से बातचीत कर जानकारी दे रही हैं रजनी अरोड़ा

आंखों की होने वाली बीमारियों में एक ट्रेकोमा भी है। यह कंजंक्टिवाइटिस की तरह होने वाली संक्रामक बीमारी है, जो क्लैमाइडिया ट्रेकोमैटिस बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण होती है। अगर समुचित इलाज न किया जाए या संक्रमण लंबे समय तक बना रहे, तो इससे आंखों की रोशनी भी जा सकती है। तभी इसे दुनियाभर में संक्रामक अंधेपन या नजर कमजोर होने का प्रमुख कारण माना जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, आज दुनियाभर में लगभग 14 करोड़ लोग ट्रेकोमा संक्रमण का शिकार हैं और ट्रेकोमा ब्लाइंडनेस के रिस्क पर हैं। हालांकि भारत में ट्रेकोमा के शिकार लोगों का प्रतिशत 0.7 से भी कम है। 2017 में भारत को ट्रेकोमा मुक्त घोषित कर दिया गया था, लेकिन इसकी अनदेखी बिल्कुल भी उचित नहीं है।

क्या हैं कारण 
ट्रेकोमा बैक्टीरिया संक्रमित व्यक्ति की आंख, नाक और गले से निकलने वाले डिस्चार्ज के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से फैलने के कारण होता है। यह एक व्यक्ति से दूसरे में आसानी से फैलता है। संक्रमित व्यक्ति से हाथ मिलाने, कपड़े या निजी चीजें शेयर करने और संपर्क में आने पर बैक्टीरिया दूसरे व्यक्ति के शरीर में पहुचते हैं। यह पीड़ित व्यक्ति के डिस्चार्ज पर बैठी मक्खियों के माध्यम से दूसरे व्यक्ति तक फैल सकता है। खासतौर पर ट्रेकोमा बैक्टीरिया की चपेट में खराब वातावरण में रहने, सामुदायिक स्वच्छता के अभाव, साफ पानी की कमी, शौचालय की समुचित व्यवस्था न होने, पर्सनल हाइजीन का ध्यान न रखने वाले व्यक्ति ज्यादा आते हैं। छोटे बच्चे इसके सबसे ज्यादा शिकार होते हैं। ट्रेकोमा बैक्टीरिया संक्रमण पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में चार गुना ज्यादा मिलता है, क्योंकि वे संक्रमित बच्चे के संपर्क में ज्यादा रहती हैं। कई मामलों में नवजात शिशु में होने वाला कंजंक्टिवाइटिस रोग ट्रेकोमा संक्रमित मां के कारण होता है।

इसमें क्या होता है
ट्रेकोमा बैक्टीरिया आंखों की ऊपरी पलक की अंदरूनी सतह कंजंक्टाइवा और कॉर्निया को प्रभावित करता है। संक्रमण होने पर आंखों की पलकों में धीरे-धीरे घाव होने लगता है और वह अंदर की तरफ मुड़ जाता है, जिसे ट्राइकियासिस कहा जाता है। अंदर मुड़ी पलकें कॉर्निया की सतह से रगड़ खाती हैं, जिससे आंखों में डिस्चार्ज के साथ तेज दर्द भी रहता है। दर्द से बचने के लिए मरीज अपनी पलकें बाहर निकालने की कोशिश करता है। समुचित उपचार न कराए जाने पर संक्रमण बढ़ता जाता है, जो कॉर्निया को नुकसान पहुंचाता है। इसमें कॉर्निया सिकुड़ने लगता है, जिससे नजर कमजोर होती जाती है और अंधेपन की स्थिति भी आ जाती है।

लक्षण को जानें
बैक्टीरियल संक्रमण होने के बाद ट्रेकोमा के लक्षण 

5-10 दिन के भीतर शुरू होते हैं। बैक्टीरिया आमतौर पर दोनों आंखों को प्रभावित करते हैं। हल्की खुजली और आंखों में जलन, पलकों खासकर ऊपरी पलक और लिम्फोमा नोड में सूजन, पलक के अंदर की ओर छोटी-सी सफेद गांठ, हल्का दर्द, लालिमा आ जाती है। पानी डिस्चार्ज होता है, रगड़ने पर निशान पड़ते हैं।

कैसे होती है पहचान
प्रभावित व्यक्ति की आंखों में किसी भी तरह की समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉक्टर अपने मरीज की केस हिस्ट्री जानने के साथ आंखों और पलक झपकने की जांच करते हैं।

क्या हैं उपचार
– डब्ल्यूएचओ ने 2025 तक दुनियाभर में ट्रेकोमा की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य रणनीति विकसित की है। इसे उन्होंने सेफ नाम दिया है। इसके तहत एस यानी सर्जिकल देखभाल, ए यानी एंटीबायोटिक्स, एफ यानी चेहरे की सफाई और ई यानी साफ-सफाई युक्त अच्छा पर्यावरण या वातावरण ।
– मरीज की स्थिति के हिसाब से एजिथ्रोमाइसिन एंटीबायोटिक की सिंगल ओरल डोज दी जाती है, जिसे कम से कम 3 साल तक 
6 महीने में दोहराया जाता है। यह मेडिसिन बैक्टीरिया को नष्ट करने, संक्रमण के उपचार और बीमारी के प्रसार को कम करने के लिए दी जाती है। एंटीबायोटिक्स केवल मरीज को ही नहीं, परिवार के दूसरे सदस्यों को भी दी  जाती है। जिन क्षेत्रों में ट्रेकोमा के मरीज ज्यादा हैं, वहां बड़े पैमाने पर इलाज की जरूरत होती है। पूरे समुदाय के लोगों पर नजर रखी जाती है।
– पलक में ज्यादा विकृति आने पर सर्जरी करके पलक को ठीक किया जाता है, ताकि पलकों के रगड़ने से आई-बॉल को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।
– ट्रेकोमा संक्रमण के जोखिम और पुन: संक्रमण को कम करने के लिए मरीज को ही नहीं, पूरे समुदाय के लिए समुचित कदम उठाने की योजना बनाई जाती है।

(एशियन हॉस्टिपल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. निखिल सेठ से की गई बातचीत पर आधारित)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *